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आजकल खानपान और खराब जीवनशैली की वजह से डायबिटीज के रोगियों की संखà¥à¤¯à¤¾ तेजी से बॠरही है। डायबिटीज के मरीजों को डाइट पर अधिक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। à¤à¤¸à¥‡ में डायबिटीज के मरीज के लिठरोटी फायदेमंद है या नहीं, इससे जà¥à¥œà¥€ जानकारी मौजूद है इस लेख में। साथ ही हम आपको बताà¤à¤à¤—े कि शà¥à¤—र में कितनी रोटी खानी चाहिà¤à¥¤ तो इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में पà¥à¥‡à¤‚ डायबिटीज में रोटी खाने के फायदे और इससे जà¥à¥œà¥€ अनà¥à¤¯ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारियां।
शà¥à¤—र में कितनी रोटी खानी चाहिà¤?
डायबेटिकà¥à¤¸ जब अपने खानपान में बदलाव करने की सोचते हैं तो सबसे पहला सवाल उनके मन में चावल और रोटी खाने से जà¥à¥œà¤¾ ही आता है। दरअसल, चावल और रोटी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आहार के अहम हिसà¥à¤¸à¥‡ हैं।
à¤à¤¸à¥‡ में मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ मरीज का यह सोचना कि शà¥à¤—र में कितनी रोटी खानी चाहिठया à¤à¤• दिन में कितनी रोटी खानी चाहिà¤, सामानà¥à¤¯ है। तो डायबिटीज के मरीज जो पहले मनमरà¥à¤œà¥€ से रोटियों खाते थे वे जानना चाहेंगे कि शà¥à¤—र में कितनी रोटी खानी चाहिठऔर किस आटे की रोटी खाना शà¥à¤—र में फायदेमंद होता है।
बता दें कि डायबिटीज à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वयसà¥à¤• 2 छोटी रोटियां अपने हर दिन के मील में à¤à¤• बार ले सकते हैं।
डायबिटीज में कारà¥à¤¬à¥à¤¸ को विशेष रूप से काउंट किया जाता है और रोटी में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤¯à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ होता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का मानना है कि à¤à¤• डायबिटीज का वयसà¥à¤• अपनी मील में 45 -60 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥à¤¸ ले सकता है और सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ में 15 से 20 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥à¤¸ ले सकता है। à¤à¤• मीडियम रोटी में लगà¤à¤— 20 से 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥à¤¸ होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में 2 छोटी रोटियों का सेवन किया जा सकता है।
बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने के लिठकौन सा आटा फायदेमंद होता है?
शà¥à¤—र के पेशेंट को अपने à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और फाइबर के साथ अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को à¤à¥€ शामिल करना चाहिà¤à¥¤ बाजार में मिलने वाले गेहूं के आटे में चोकर (à¤à¥‚सी) निकाल दी जाती है, जिससे उसमें मौजूद कà¥à¤› पोषक ततà¥à¤µ à¤à¥€ चोकर के साथ निकल जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में आटा मैदे के समान हो जाता है, जो शà¥à¤—र के मरीजों के लिठनà¥à¤•सानदायक हो सकता है।
हालांकि, इसका हल à¤à¥€ है, आप आटे के कà¥à¤› सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकलà¥à¤ª देख सकते हैं। तो बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने के लिठकà¥à¤› हेलà¥à¤¦à¥€ आटे निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं:
​चने का आटा
बाजरे का आटा
जà¥à¤µà¤¾à¤° का आटा
रागी का आटा
सोया आटा
ओटà¥à¤¸ का आटा
कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ का आटा
मलà¥à¤Ÿà¥€à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¨ आटा
जौ का आटा
बेसन
डायबिटीज के लिठ8 तरह की रोटियां, जानें फायदे और रेसिपीज
यहाठजानिठकि शà¥à¤—र में कौन-सी रोटी खानी चाहिठऔर डायबिटीज में रोटी खाने के फायदे कà¥à¤¯à¤¾ हैं। साथ ही यहाठइन रोटियों को बनाने की विधि à¤à¥€ जानें।
1.चने के आंटे की रोटी
चने की रोटी डायबिटीज को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ मानी जाती है। यह डायबिटीज के मरीज के लिठबेसà¥à¤Ÿ रोटी में से à¤à¤• है। चने की रोटी गà¥à¤²à¥‚टेन फà¥à¤°à¥€ होती है। बता दें कि गà¥à¤²à¥‚टेन बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को बà¥à¤¾ सकता है। इसके साथ चने की रोटी का गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• इंडेकà¥à¤¸ à¤à¥€ काफी कम होता है। इससे बनी रोटी का सेवन रोजाना करने से बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को कम किया जा सकता है। इसको खाने से शरीर में अचà¥à¤›à¥‡ कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤² की मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ बढ़ सकती है।
बनाने की विधि:
2 कप चने का आटा और à¤à¤• कप गेहूं का आटा लें।
अपनी पसंद के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसमें थोड़ा बेसन à¤à¥€ डाल सकते हैं।
चने का आटा मोटा होता है, इसलिठइसे जलà¥à¤¦à¤¬à¤¾à¤œà¥€ में न बनाà¤à¤‚।
अब गेहूं, चने के आटे और बेसन को अचà¥à¤›à¥‡ से मिलाकर गूथ लें।
रोटियां बनाकर इसे धीमी आंच पर सेंक लें।
2.बाजरे की रोटी
डायबिटीज के लिठबाजरे की रोटी बहà¥à¤¤ फायदेमंद होती है। बाजरे में मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है। यह बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को बढ़ने से रोक सकता है। बाजरे में गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• इंडेकà¥à¤¸ कम मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है, जिससे बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल बढ़ने का जोखिम à¤à¥€ कम होता है। अतः डायबिटीज के रोगियों के लिठबाजरे से बनी रोटी लाà¤à¤•ारी हो सकती है।
बनाने की विधि:
बाजरे के आटे की थोड़ी सी मातà¥à¤°à¤¾ लें और उसे गरà¥à¤® पानी से गूथें।
छोटी-सी लोई लेकर हथेलियों में दबा-दबाकर रोटी बनाà¤à¤‚। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें धीरे-धीरे रोटी बनाà¤à¤‚, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ रोटी टूट सकती है।
इसे तवे पर डालकर दोनों तरफ अचà¥à¤›à¥€ तरह धीमी आंच में सेंक लें।
इसे घी लगाकर सरà¥à¤µ कर सकते हैं।
3.जà¥à¤µà¤¾à¤° की रोटी
जà¥à¤µà¤¾à¤° में डायटà¥à¤°à¥€ फाइबर के साथ मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ पाया जाता है। जो बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को कम करने में मदद कर सकता है। जà¥à¤µà¤¾à¤° की रोटी डायबिटीज फà¥à¤°à¥‡à¤‚डली होती है। जà¥à¤µà¤¾à¤° की रोटी मे गà¥à¤²à¥‚टेन नहीं होता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ जà¥à¤µà¤¾à¤° की रोटी खाने की सलाह देते हैं।
बनाने की विधि:
1 कप जà¥à¤µà¤¾à¤° का आटा और उसमे à¤à¤• टेबलसà¥à¤ªà¥‚न घी डालें।
इसमें सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° नमक मिलाà¤à¤‚।
आटे को हलà¥à¤•े हाथों से गूंथ ले।
हथेली की सहायता से रोटी बना लें।
इस दौरान गैस पर तवा गरà¥à¤® होने के लिठचà¥à¤¾ दें।
जब तवा गरà¥à¤® हो जाठतो जैसे गेंहू के आटे की रोटी बनाते हैं वैसे रोटी को दोनों तरफ धीमी आंच पर अचà¥à¤›à¥€ तरह सेंककर रोटी बना लें।
4.रागी की रोटी
डायबिटीज के मरीज के लिठरोटी की बात की जाठतो रागी की रोटी à¤à¥€ लाà¤à¤•ारी हो सकती है। दरअसल, रागी में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में फाइबर पाया जाता है। इसको खाने से पेट काफी देर तक à¤à¤°à¤¾ रहता है। जिससे आप ओवरईटिंग से बचते हैं। वजन कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने में रागी के आटे की रोटी काफी मददगार होती है। फाइबर को पचने में बहà¥à¤¤ समय लगता है जो आपके बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° डायबिटीज के रोगी को फाइबर से à¤à¤°à¤ªà¥‚र à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने की सलाह देते हैं।
बनाने की विधि:
1 कप रागी के आटे में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर अचà¥à¤›à¥‡ से आटा गूंथ लें।
बटर पेपर या केले के पतà¥à¤¤à¥‡ का टà¥à¤•ड़ा लें, उस पर 1 लोई रखें और हलà¥à¤•े हाथों से थपथपाकर à¤à¤• समान फैला लें।
अब तवे को मधà¥à¤¯à¤® आंच पर गरà¥à¤® करें और उस पर थोड़ा तेल लगा दें, फिर बटर पेपर या केले के पतà¥à¤¤à¥‡ पर बनी रोटी को तवे पर पलट दें।
बटर पेपर या केले के पतà¥à¤¤à¥‡ को धीरे से हटा लें।
रोटी को दोनों तरफ अचà¥à¤›à¥‡ से सेंक लें।
इसे नारियल की चटनी के साथ गरà¥à¤®-गरà¥à¤® सरà¥à¤µ करें।
5.सोया रोटी
रिसरà¥à¤š में पाया गया है कि सोया में आइसोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¥‹à¤¨à¥à¤¸ (isoflavones) पाया जाता है, जो डायबिटीज को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मदद कर सकता है। यह शरीर में गà¥à¤²à¥‚कोज टॉलरेनà¥à¤¸ को à¤à¥€ बढ़ा सकता है। यह डायबिटीज ही नहीं, बलà¥à¤•ि कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² लेवल को बढ़ने से रोक सकता है और हृदय रोग के खतरे को à¤à¥€ कम कर सकता है।
बनाने की विधि:
1 कप गेहूं के आटे में 2 से 3 टेबलसà¥à¤ªà¥‚न सोया का आटा मिला लें।
आप इसमें सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नमक, मिरà¥à¤š आदि à¤à¥€ मिला सकते हैं।
आटे को गूंथ लें और थोड़ी देर रख दें।
फिर इससे रोटी बनाकर, अचà¥à¤›à¥‡ से दोनों तरफ सेक लें।
गरà¥à¤®-गरà¥à¤® सरà¥à¤µ करें।
6.ओटà¥à¤¸ की रोटी
ओटà¥à¤¸ डायबिटीज के मरीजों के लिठबहà¥à¤¤ फायदेमंद हो सकता है। ओटà¥à¤¸ से बनी रोटी खाने से आपका बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल बैलेंसà¥à¤¡ रह सकता है। इसको रेगà¥à¤²à¤° खाने से टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है। ओटà¥à¤¸ का गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• इंडेकà¥à¤¸ कम होता है।
इसमें फाइबर होता है जो आपके बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र को रेगà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ करने में मदद कर सकता है। ओटà¥à¤¸ में बीटा गà¥à¤²à¥‚कॉन डायबिटीज बढ़ने के रिसà¥à¤• को कम कर सकता है। ओटà¥à¤¸ की रोटी आपको हृदय रोग से à¤à¥€ बचा सकती है।
बनाने की विधि:
रोटी बनाने के लिठ1 कप ओटà¥à¤¸ और 1 कप आटा बराबर मातà¥à¤°à¤¾ में लें।
इसमें आप सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नमक, मिरà¥à¤š, पà¥à¤¯à¤¾à¤œ आदि डाल सकते हैं।
ओटà¥à¤¸ को मिकà¥à¤¸à¥€ में बारीक पीस लें।
बारीक पिसे ओटà¥à¤¸ के आटे को गेहूं के आटे के साथ मिलाकर आटा गूंथ लें।
सामानà¥à¤¯ रोटी की तरह ही रोटियां बनाकर, तवे पर दोनों तरफ अचà¥à¤›à¥‡ से सेंक लें।
7.कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ के आटे की रोटी
डायबिटीज के मरीज के लिठरोटी की बात करें तो कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ का आटा à¤à¥€ à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है। कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ का आटा गà¥à¤²à¥‚टेन फà¥à¤°à¥€ होता है, इसमें विटामिंस, मिनरलà¥à¤¸ और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। ये डायबिटीज के मरीजों के लिठà¤à¤• हेलà¥à¤¦à¥€ डाइट है। इसमें कारà¥à¤¬à¥à¤¸ à¤à¥€ कम होता है और यह à¤à¤• हाइपोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• फूड है। कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ के आटे में फाइबर और फाइटोनà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤à¤‚टà¥à¤¸ होते हैं जो डायबिटीज को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखने में मदद कर सकते हैं।
बनाने की विधि:
1 कप कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ के आटे में थोड़ा-थोड़ा करके गरà¥à¤® पानी डालकर सॉफà¥à¤Ÿ आटा गूंथ लें।
अब आप इस गà¥à¤¥à¥‡ आटे से कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ की रोटी बना सकते हैं।
चकले बेलन की सहायता से कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ की रोटी बेलकर बना लें और सामानà¥à¤¯ रोटी की तरह सेंक लें।
सबà¥à¤œà¥€ के साथ गरà¥à¤®-गरà¥à¤® सरà¥à¤µ करें।
8.मलà¥à¤Ÿà¥€à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¨ आटे की रोटी
मलà¥à¤Ÿà¥€à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¨ आटे से बनी रोटी शरीर में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ करती है। सामानà¥à¤¯ आटे में आपको सीमित पोषक ततà¥à¤µ मिलेंगे, लेकिन मलà¥à¤Ÿà¥€à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¨ आटा में à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में फाइबर होता है, जो डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® को बेहतर कर सकता है। मलà¥à¤Ÿà¥€à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¨ आटा बाजरा, रागी, जà¥à¤µà¤¾à¤°, चना या बेसन, गेहूं के आटे को मिलाकर घर में बनाया जा सकता है। यह बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र के लेवल को मैनेज रखने में मदद कर सकता है। बाजरे और जà¥à¤µà¤¾à¤° में हारà¥à¤¡ कारà¥à¤¬à¥à¤¸ होते हैं, जो पचने में अधिक समय लेते हैं और बà¥à¤²à¤¡ फà¥à¤²à¥‹ में शà¥à¤—र को धीरे-धीरे छोड़ते हैं, वहीं, रागी में फाइबर और कम गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• इंडेकà¥à¤¸ होता है।
बनाने की विधि:
डेॠबड़ा चमà¥à¤®à¤š बेसन, 1 बड़ा चमà¥à¤®à¤š टमाटर (बारीक कटा हà¥à¤†), 1 बड़ा चमà¥à¤®à¤š पà¥à¤¯à¤¾à¤œ , 1 बड़ा चमà¥à¤®à¤š धनिया पतà¥à¤¤à¥€ (बारीक कटी), 3 बड़े चमà¥à¤®à¤š गेहूं का आटा, 2 चमà¥à¤®à¤š मिरà¥à¤š पाउडर, नमक सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤°, 2 चमà¥à¤®à¤š जीरा पाउडर, पकाने के लिठतेल
तेल को छोड़कर आटा बनाने के लिà¤, सà¤à¥€ चीजों को मिलाà¤à¤‚ और पानी डालकर आटा गूà¤à¤¥ लें।
अब आटे को लगà¤à¤— 15 मिनट के लिठअलग रख दें।
छोटी-छोटी लोई बना लें और à¤à¤•-à¤à¤• करके चकले-बेलन की सहायता से रोटी बना लें।
गोल रोटी लें और कà¥à¤› तेल का उपयोग करके गरà¥à¤® तवे पर सेक लें।
रोटी दोनों तरफ अचà¥à¤›à¥‡ से पकाà¤à¤‚ जब तक कि रोटी सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¥€ à¤à¥‚री न हो जाà¤à¥¤
गरà¥à¤®-गरà¥à¤® रोटी सबà¥à¤œà¥€ के साथ सरà¥à¤µ करें।
डायबिटीज में रोटी खाने के फायदे
डायबिटीज में रोटी खाने के फायदे की बात की जाठतो बता दें हर आटे की अपनी खासियत है। à¤à¤¸à¥‡ में मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ में रोटी खाने के फायदे अलग-अलग आटे के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अलग-अलग हो सकते हैं। तो यहां हम à¤à¤¸à¥‡ ही कà¥à¤› फायदे बता रहे हैं, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं :
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ में रोटी खाने से वजन संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रह सकता है।
चने और जà¥à¤µà¤¾à¤° के आटे गà¥à¤²à¥‚टेन फà¥à¤°à¥€ होते हैं, जिस कारण इसके सेवन से शà¥à¤—र बà¥à¤¨à¥‡ का जोखिम कम हो सकता है।
रागी और ओटà¥à¤¸ के आटे में फाइबर मौजूद होता है, जो पेट को काफी देर तक à¤à¤°à¤¾ महसूस करा सकता है। इससे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बार-बार ओवर ईट नहीं कर सकता है और उसके मोटापे का जोखिम à¤à¥€ कम हो सकता है।
सोया के आटे के सेवन से हà¥à¤°à¤¦à¤¯ रोग का जोखिम कम हो सकता है।
कà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‚ के आटे में मौजूद पोषक ततà¥à¤µ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने में सहायक साबित हो सकता है।
यहाठहमने जाना कि शà¥à¤—र में कितनी रोटी खानी चाहिà¤, कौन-सा आटा डायबिटीज के लिठअचà¥à¤›à¤¾ होता है और किस आटे की रोटी खाने से बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में रहता है। साथ ही हमने डायबिटीज में रोटी खाने के फायदे à¤à¥€ बताठहैं। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है डायबिटीज के मरीज के लिठरोटी खाने से जà¥à¥œà¥€ उलà¤à¤¨ कम हà¥à¤ˆ होगी। यहां हमने डायबिटीज के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह की रोटी बनाने के तरीके à¤à¥€ बताà¤à¤‚ हैं, जो कि गेंहू के आटे के रोटी के विकलà¥à¤ª के तौर पर ले सकते हैं।
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